सभी बच्चों को चाचा का आशीर्वाद, अरे ये तो बहुत पुराना जुमला हो गया। हाय! ड्यूड,व्हाट्स अप?अब कैसा लग रहा है? अब लगा ना कुछ अपनापन। वो क्या है कि, हम बुजुर्ग वाले चाचा तो है नही, जवानी नही रही तो क्या हुआ, लेकिन दिल तो जवान है। इसलिए बेहिचक चाचा को अपना दोस्त मानो। तो फिर दोस्ती पक्की ना। हम कौन है? अरे….अगला पैराग्राफ़ पढो ना।
हमारे बारे में
मैं हूँ चाचा चतुर. ऐसा नहीं है कि लोग मेरी सफ़ेद मूँछ के कारण मुझे चाचा कह कर संबोधित करते हैं. चाचा शब्द मेरे नाम के साथ तब जुड़ गया था जब मैं कोई सात या आठ वर्ष का था.
माँ बताती है कि अल्प आयु में ही मैं ऐसी ज्ञान की बातें करता था कि लोग दूर दूर से मुझसे सलाह लेने आया करते थे. इसे ईश्वर का वरदान समझिये या विभिन्न विषयों में मेरा अथाह ज्ञान कि मेरी चौखट से कोई भी व्यक्ति समस्या का समाधान लिये बिना नहीं लौटा. इसके चलते श्रद्धालुओं ने मुझे छोटी सी आयु में ही चाचा चतुर कह कर संबोधित करना शुरू कर दिया. अब तो इस संबोधन की ऐसी आदत हो गयी है कि मैं अपना असली नाम भी भूल चुका हूँ.
मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानता हूँ कि, ईश्वर की इच्छनुसार, मैं मानव जाति के कष्ट निवारण का ईश्वरीय माध्यम बन सका हूँ. मैं ने यह व्रत लिया है कि अपनी अंतिम साँस तक मैं निःस्वार्थ भाव से लोगों को पीड़ा, कष्ट, वेदना, कुंठा या दुःख से रहित एक ऐसा मार्ग दिखाऊँगा जो मार्ग सुख, संतोष, स्वास्थ, संवेदना, सुरक्षा, संपदा, शांति, शौर्य और सद्बुद्धि के प्रकाश से प्रशस्त हो.इसलिए बेहिचक चाचा को अपना दोस्त मानिए. फिर दोस्ती पक्की ना?
मानव जाति के कष्ट निवारण के इस पुण्य काम में आप भी मेरे साथ जुड़िये. मेरी इस निःस्वार्थ सेवा का संदेश दूर दूर तक पहुंचाइये. लोगों को चतुर चाचा के अजब, अनूठे और अद्भुत सुझावों के बारे में अवगत कराइये, ताकि अधिकाधिक लोग मेरी राय से लाभान्वित हो अपने कष्टों से मुक्त हो सकें. इसके आप मेरे ब्लॉग का लिंक अपने ब्लॉग के साइडबार पर लगाइये.
यदि आप भी किसी कष्ट का निवारण तलाश रहे हैं तो बेझिझक अपना प्रश्न मुझे भेजिये. व्यस्तता के चलते, मैं एक दिन में मात्र एक ही प्रश्न का उत्तर दे पाऊँगा. मेरे जवाब या सुझाव केवल सतही तौर पर समस्या का समाधान नहीं ढ़ूँढ़ते हैं ! मैं समस्या का भावनात्मक, तकनीकी, राजनैतिक, सामाजिक, दार्शनिक, धार्मिक तथा व्यक्तिगत विश्लेशण करने के पश्चात ऐसा हल बताता हूँ कि समस्या का समूल नाश को सके. ना रहे बाँस, ना बजे बाँसुरी.
मेरे बताए गये निःशुल्क तथा निःस्वार्थ सुझावों पर अमल करते हुये इस बात का ध्यान रखिये कि इनसे होने वाली किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हानि, क्षति या कष्ट का उत्तरदायित्व पूर्णरूप से आपका और सिर्फ़ आप का ही है. चतुर चाचा, यानि कि मैं, किसी भी हानि के लिये उत्तरदायी नहीं हैं.सवाल भेजने के लिए पता नोट कर लो भई, बाद मे मत कहना कि चाचा ने पता तो दिया ही नही,चाचा को सवाल भेजने का पता है : chacha.chatur@gmail.com एक और तरीका है, सवाल भेजने का, इस वाले सम्पर्क फार्म का प्रयोग करें